हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार स्थित जूना अखाड़े के माया देवी मंदिर से पवित्र छड़ी यात्रा का विधिवत शुभारंभ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और संतों की उपस्थिति में आयोजित पूजन के बाद यात्रा को रवाना किया गया। इस अवसर पर संतों ने सनातन संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक समरसता और उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का संकल्प दोहराया।
यात्रा के शुभारंभ से पहले जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज ने मां मायादेवी, आनंद भैरव और भगवान दत्तात्रेय के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने लोककल्याण की कामना की। इसके बाद अखाड़े के वरिष्ठ सभापति प्रेम गिरि महाराज सहित अन्य वरिष्ठ संतों की मौजूदगी में पवित्र छड़ी का पूजन किया गया और यात्रा को रवाना किया गया।

सनातन परंपराओं के संरक्षण का संदेश
इस अवसर पर आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि पवित्र छड़ी यात्रा केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा आयोजन नहीं है, बल्कि यह सनातन परंपराओं के संरक्षण, सांस्कृतिक पुनरुत्थान और सामाजिक समरसता का संदेश भी देती है। उन्होंने प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने में इस तरह की यात्राओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में आपसी सद्भाव और सांस्कृतिक चेतना को भी प्रोत्साहन मिलता है।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर
जूना अखाड़े के संरक्षक हरि गिरि महाराज ने कहा कि पवित्र छड़ी यात्रा धार्मिक आस्था और प्राचीन परंपराओं को उत्तराखंड के विकास से जोड़ने का माध्यम है। यात्रा के जरिए केदारनाथ, बदरीनाथ सहित प्रदेश के विभिन्न धार्मिक स्थलों, ऐतिहासिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इससे उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की संभावनाएं मजबूत होंगी। धार्मिक स्थलों की पहचान बढ़ने से प्रदेश में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी उत्तराखंड की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
कुमाऊं और गढ़वाल में बेहतर संपर्क की जरूरत
हरि गिरि महाराज ने प्रदेश के समग्र विकास के लिए कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों के बीच बेहतर सड़क संपर्क विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यटन के विस्तार के साथ स्थानीय लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों को गति देना भी आवश्यक है।
उन्होंने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधारभूत सुविधाओं के विकास और प्रमुख धार्मिक स्थलों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाकर उत्तराखंड की पर्यटन संभावनाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है।
पवित्र छड़ी यात्रा के शुभारंभ के साथ ही संतों ने सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार, धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और प्रदेश में पर्यटन विकास का संदेश दिया। इस आयोजन को उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।

