Utkarsh Jyoti 28 August: भारत की सरकारी बिजली कंपनी एनएचपीसी लिमिटेड (NHPC) इन दिनों एक बार फिर चर्चा में है — वजहें भी कई हैं। जहां एक तरफ निवेशकों की नजर इसके शेयर पर बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़ के दौरान इसकी तकनीकी टीमों की सक्रियता भी सुर्खियों में रही। इसके साथ ही जनजातीय कर्मचारियों से जुड़ी एक अहम समीक्षा बैठक भी खबरों में रही।
सबसे पहले बात बाजार की करें, तो हाल ही में जारी हुए एक विश्लेषण में NHPC का P/E रेशियो 26.3x बताया गया है। यह आंकड़ा भारत के औसत 28x से थोड़ा कम है, लेकिन जानकारों का मानना है कि कंपनी की दीर्घकालिक मजबूती और स्थिरता इसे एक बेहतर निवेश विकल्प बनाती है। खास तौर पर वे निवेशक जो कम जोखिम के साथ भरोसेमंद रिटर्न की तलाश में रहते हैं, उनके लिए NHPC एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।
इधर जम्मू-कश्मीर में हालिया बाढ़ ने कई ज़िलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बिजली आपूर्ति भी ठप हो गई थी, जिसे बहाल करने के लिए राज्यपाल मनोज सिन्हा ने उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में NHPC को पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर बिजली आपूर्ति की बहाली का जिम्मा सौंपा गया। कंपनी की टीमों ने तेजी से काम शुरू किया और कई क्षेत्रों में आपूर्ति फिर से चालू कर दी गई है।
वहीं, 22 अगस्त को NHPC के मुख्यालय में एक और अहम बैठक हुई, लेकिन इस बार केंद्र में थे अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के कर्मचारी। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने कंपनी के साथ बैठक की जिसमें ST कर्मचारियों के लिए आरक्षण नीति, पदोन्नति, कल्याण योजनाएं और शिकायत निवारण जैसी व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। आयोग ने NHPC को इन मोर्चों पर पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए दिशा-निर्देश भी दिए।
इन तमाम घटनाओं से साफ है कि NHPC सिर्फ एक पावर जनरेशन कंपनी नहीं, बल्कि सामाजिक ज़िम्मेदारी निभाने वाली एक ऐसी संस्था बन चुकी है जो निवेशकों के लिए भी भरोसेमंद है और कर्मचारियों के हक की भी बात करती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी कैसे इन तमाम मोर्चों पर संतुलन बनाए रखती है।

